Wednesday, February 20, 2013

Street Poetry

True to my U.P. roots, a total time pass street-shayari ..
नज़रों की धार से 
जो वार करती हो 
अच्छे खासे आदमों को 
बेकार करती हो 
किस किस के हवाले से 
सुनते आ रहे हैं हम 
दिलों का जो तुम 
कारोबार करती हो

--Hyderabad, January 10, 2013

New Year

To the years gone by, and the one in the coming.. In the end, they all reduce to a tiny smile at your own self. 
गुज़रे हुए वक़्त को समेटकर 
पोटली में रखते रहे हम 
आज उसे खोला भी तो क्या
एक ज़रा सी हँसी निकली

--Hyderabad, January 1, 2013

Kalam..


।। कलम ।।

कलम ..
गिर चुका है हाथ से
या शायद हो अभी
पर मुझे एहसास नहीं
क्योंकि ..
मैं देख नहीं सकता
और अब तो शायद
महसूस भी नहीं

कहते हैं लिखने में
दिल का होना ज़रूरी है
और दिल में जज़्बातों का,
रहा होगा शायद कभी
दिल भी मेरे पास
और उस दिल में
कुछ जज़्बात
जो क़ारोबार की
जद्दोजहद में
दम तोड़ गए
या शायद
मेरे ही हाथों
क़त्ल हो गए

अफ़सोस तो है
मगर डर भी लगता है
दिल से, जज़्बातों से
हैरत से, ख़यालों से
कहीं कमज़ोर न पड़ जाऊं,
ज़िन्दगी के शोर्ट स्प्रिंट में
ट्रैक से न भटक जाऊं

पिछले सालों के यार दोस्त
वो कुछ नज्में, कुछ रुबाई
जो बड़ी शिद्दत से लिखी थीं
कभी कभी आ जातीं हैं
मुझसे मिलने,
तो ख़ादिम से कह देता हूँ
के कह दो
नहीं रहता अब मैं यहाँ
नहीं रहता अब मैं यहाँ

कलम ..
शायद गिर चुका है हाथ से

--Hyderabad, Dec 24, 2012 

Stories

May be all we need to learn from his world are .. stories

एक कहानी 
और उसके अन्दर
कितनी सारी कहानियाँ
और उनके अन्दर और भी कहानियां 

कहानियों से ही 
बनी होगी ये दुनिया
वक़्त की लम्बी सलाई पे 
जज़्बातों की ऊन से
डाले होंगे उसने
कई सारे फंदे
बुने होंगे उसने
कई सारे किस्से
ज़िन्दगी हालात
और हम

एक कहानी
दूसरी को कहती हुई
तो एक कहानी
दूसरी को
सुनती हुई
खिलाती हुई
निखारती हुई
सँवारती हुई
बिगाड़ती हुई
साथ लेती हुई
काटती हुई
एक दुसरे में
उलझती हुई
पिघलती हुई
कहानियाँ ..

आज एक पल को
रुक के देखा तो
देखीं ..
कितनी सारी कहानियाँ


--ISB Hyderabad, Nov 26, 2012

That Yesterday's Rain

perks of staying back. windy atrium, not with assignments, but poetry!
कल की बारिश

आग सा 
बरसा है पानी आज,
बूंदों में कोई
अफरा तफरी सी है,
दबी हुई आग से
शोले भड़भड़ा
रहे हों जैसे

आज फिर
कोई क़त्ल करके
आई है ये बारिश,
कतरा कतरा खून
रिस रहा है कहीं,
वो पानी चल रहा है
या आंसूं बह रहा है कोई,
छटपटा रहा है कोई
पर हलचल नहीं होती,
चींख रहा है कोई
पर आवाज़ नहीं होती,
गरजते हुए कोहराम में
ज़ख्म पे पड़ते हैं
ये छीटें,
तो धार की तरह
काट देते हैं उन्हें,
छिल जाता है बदन
और गल सी जाती है रूह,
मिट जाते हैं सारे निशाँ
धुल जाते हैं सारे बिनाह
और सील जाते हैं सारे सुराह

में जानता हूँ इसे,
ये बारिश,
कातिलाना है
आज फिर किसी
दिल का खूँ हुआ है
आज फिर
कोई दिल कुर्बां हुआ है
ये बारिश..
कातिलाना है


--ISB Hyderabad, October 3, 2012

Beautiful evening, Lazy poetry...


दूर तक फैला हुआ
इस जवां शाम का
ये नारंगी आसमां,
पत्थरों से लब्दबी
ये सदियों पुरानी ज़मीं,
ये जहां मिलते हैं
कहते हैं वहाँ
कोई नहीं जाता,
ना कोई शख्स
ना कोई आवाज़
ना कोई ख्याल,
कोई मुझे
वहाँ ले चलो
बस..
वहाँ ले चलो

आज शाम को
बाईक पे निकला
तो बालों को सहलाते हुए
ठंडी महकती हवा
हौले से कान में
कुछ कहती हुई
ना जाने क्या निकल गयी
के मैं मौन, बे-खयाल, बे-आवाज़
बस आगे बढ़ गया,
फिर उसी दुनिया की तरफ
फिर उसी आसमां के नीचे
फिर उसी ज़मीं के ऊपर

दूर तक फैला हुआ
इस जवां शाम का
ये नारंगी आसमां

~:Thoughts on Independence day:~

~:Thoughts on Independence day:~
The land, my child, is never possessed never redeemed
Twas there before us and will remain when we're gone
Till it with respect, Claim it by love, and Protect it with blood
For in great pain and labor, this nation was born

Happy Independence Day !

--Hyderabad, 15 August 2012