Sunday, September 28, 2008

The CountDown - Day 1


Opened my palms and stared at those deep engraved lines. They stared right back at me !!

Found this piece lying around that I wrote in Austin on a similar note..

छोटी सी एक हथेली

छोटी सी एक हथेली
हथेली पे घुद्मुद लकीरें
लकीरों में छुपी
एक करारी कहानी
कहानी ऐसी कि
चिल्ला के बोली
ना ना ना
मुझको ना पढना
अगर पढ़ लिया
तो किसी को कहना
राज़ मेरे
ही हैं मेरा गहना |
सुन मुन्नी रानी
तेरी प्यारी हंसी
नहीं मैं भी कोई
मामूली छड़ी
बड़ी चुलबुली मैं
बड़ी बावरी,
कभी जो चटाऊँ
मिर्ची का दाना
कभी घोल दूं
मिसरी की बड़ी |
मेरे साथ चल
करेंगे शैतानी ,
बुलाते हैं सब
मुझे ज़िन्दगानी |

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[BTW, I ll end this 'zindagi' series (which started with Day 6) with one more post .. that for Day-zero (the intent was to have 7 posts in total - one for each day of the week..). So ek baar aur aa jaana :)]

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