Thursday, September 26, 2013

30th

For her, to whom this day really belongs, 

माँ तो अब भी वैसे ही पालती है हमें 
लोग ये कहते हैं हम आज तीस के हुए

Wednesday, February 20, 2013

Respite

[Collecting an old piece..]

beautiful weather in delhi ! wish i had a picture

रोज़ काम पर 
पसीने बहाने वाली
दिल्ली ने आज
अपने लिए कुछ समय निकाला,
पहली पहली बारिश में
ज़रा चैन से नहायी,
बुझती हुई शाम के रंग
में नारंगी सी साड़ी पहनी,
चढ़ती हुई रात से
थोडा काजल लगाया,
और डूबते हुए सूरज
की सुनहरी छठा में
आँखें मूँद कर
एक लम्बी सांस ली,
इत्मीनान की सांस,
सुकून की सांस,
तपते हुए बदन पर
किसी ने ठंडा हाथ
रख दिया हो जैसे

आज शहर में
महीनों बाद बारिश हुई


--Delhi, April 11, 2012

Delhi, yet again !

फिर दिल्ली 

इस शहर की बारिश 
अब भी 
उतनी ही जिद्दी है,
और मुझे देखकर तो
और भी बिगड़ जाती है,
हो भी क्यों ना 
महीनों जो खबर नहीं लेता 

फरवरी की इस सर्दी में
जब हर कोई घरों में बंद है
ये कल रात से ही
बैचैन बरस रही है,
मैं भी थक हारकर
वही पुराना शॉल ओढ़े
गुलज़ार साहब की
एक नज़्म लेकर
बैठ गया हूँ
खिड़की से लगे
आर्म चेयर पर,
कभी कागज़ पे आराम फरमाते
अल्फाजों को देखता हूँ
तो कभी बहार उमड़ते
सैलाब को


--Delhi, Feb 17, 2013

मुलाक़ात


फिर एक मुलाक़ात 
अधूरी रह गयी, 
फिर एक सवाल 
सवाल रह गया, 
ज़ेब में मिले 
सूखे हुए ख्याल, 
फिर उनका अलाव जलाकर 
ये सर्द रात काट रहा हूँ 
--Hyderabad, Jan 20, 2013

Stuck. :)

वो शहर 
सिर्फ छतों पर बसता था
वरना गलियों में तो 
पैर रखने की जगह नहीं

हम उसे छोड़ तो आये हैं
पर उसकी छतों से 
अब तक ..
उतर नहीं पाए

--Hyderabad, Jan 17, 2013

sankranti @ old city

images from an evening at the old city
पतंगें 

पुराने शहर का 
पतंगों से कुछ 
ख़ास ही वास्ता है 
जो इतनी सारी 
उमड़ पड़ती हैं 
हर साल इसी दिन 
इन्हीं ऊँची ऊँची 
छतों पर

और शहर ,
मखमली सी शाम ओढ़े
ईरानी चाय की चुस्की लेता
ओस्मानिया के बिस्कुट चबाता
5 नंबर का मोटा पुराना
मार्टिंस का चश्मा लगाये
बड़े गौर से
ताक रहा है
इन अनगिनत पतंगों को

लाल पीली नीली
बेजार चमकीली
छोटी बड़ी
कितनी पतंगें
पतंगों को काटती पतंगें
दुलारती पतंगें
और किसी किसी छोर पर
लालटेन ले जाती पतंगें
सक्रांति की अंधियारी
रात में शायद
रस्ता भूल चुके पंछियों को
राह दिखा रही हैं

इन्हीं अल्हड मस्त
पतंगों के बीच
ज़ारीन सी अदब वाला
हिलाल का वो चाँद
जो सबसे ऊपर उड़ रहा है
कभी नीचे क्यों नहीं आता !

काश ये चाँद भी
पतंग होता जानू
तो एक दूर का मंजा डालकर
इसे यहीं उतार लेता
इसी छत पर
..तुम्हारे लिए

Glossary : ज़ारीन = golden colored, अदब = well mannered, हिलाल = crescent shaped


--a rooftop @ old city, Hyderabad. Jan 13, 2013

Losing my self realization

कुछ उधड़े फंदों में 
झूल गया हूँ मैं 
खुद को कहीं रख के 
भूल गया हूँ मैं