Sunday, June 12, 2011

चाँद

फिर किसी बात पर चाँद बिगड़ गया
आज रात फिर अमावस होगी
फिर अंधियारा पसरेगा
तुमसे कहा था ना
चाँद से यूं उलझा न करो

बिन कोरी चांदनी अब
कैसे मैं पड़ोस घर
आलन लेने जाऊंगी
कैसे बर्तन भांडे होंगे
ढ़ोरों को चारा होगा
कैसे मुन्ना सोवेगा

तुम कैसे खेतों को बाचोगे
अब तो ये मुई गाय भैंसे भी
रोशनी बिन पूरी रात
घुड़मुड घुड़मुड करने लगी हैं

फिर किसी बात पर चाँद बिगड़ गया
तुमसे कहा था ना
चाँद से यूं उलझा न करो
उफ़. पूरा महीना निकल जायेगा
अब उसे मनाते मनाते

4 comments:

Chetan said...

Good one.

Priyanka Vaishnav said...

u write so well... too good.. :)

Priyanka Vaishnav said...
This comment has been removed by the author.
m s rathi said...

hai allah !!!!